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Striyan

Striyan

Paperback

General Fiction

PREORDER - Expected ship date December 3, 2026

ISBN10: 9358699485
ISBN13: 9789358699487
Publisher: Pralek Prakashan
Published: Dec 3 2026
Pages: 348
Weight: 0.89
Height: 0.78 Width: 5.50 Depth: 8.50
Language: Hindi

गायत्री की कविताओं से गुजरना एक ऐसी जीवंत चित्रावीथि से गुजरना है जो किसी आर्ट गैलरी में समाएगी नहीं ठीक वैसे जैसे राजा रवि वर्मा के चित्रों की प्रतीक्षारत नायिकाएं नहीं समायीं। पर एक तात्त्विक फर्क भी है रवि वर्मा और गायत्री की नायिकाओं में। यह फर्क सिर्फ वर्ग-भेद का नहीं, पुरुष-दृष्टि और स्त्री-दृष्टि का भी है। रवि वर्मा की नायिकाएँ सजी-धजी बैठी हैं, अवसाद में डूबी, एकदम अकेली वे बैठी हैं, हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं और उनकी हथेलियों का गठन ऐसा है कि साफ पता चल जाए, उन्होंने कभी कोई खर भी नहीं टसकाया, आँखों में नीर भरे मौन प्रतीक्षा की है जीवन भर कि कोई आए और यह दुरूह, विजन एकांत गहन तादात्म्य के सामगान से निनादित हो उठे। इसके विपरीत गायत्री की नायिकाएँ, अमृता शेरगिल की नायिकाओं की तरह, झुंड में बैठी हुई लगातार कुछ-कुछ किए जाती हैं, कभी आपस में कुछ-कुछ बोलती-बत्तियाती हुई. कभी गुपचुप कुछ सोचती हुई भी, लेकिन कुल मिलाकर उन्हें सजने-सँवरने का कोई अवकाश नहीं और उनकी इयत्ता कुल मिलाकर एक सामूहिक इयत्ता ही है। जिस सामूहिक इयत्ता की बात मैंने कही, उसी के दम पर पर्सनल का विस्तार पोलिटिकल तक हो पाता है। सर्वसमावेशी यह निजी इयत्ता ही सामूहि

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