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Sanatan Satya: Bhagwat Gita Ka Manovigyan Bhag-4 (सनातन सत्य भगवद्

Sanatan Satya: Bhagwat Gita Ka Manovigyan Bhag-4 (सनातन सत्य भगवद्

Hardcover

Philosophy

ISBN10: 9376961781
ISBN13: 9789376961788
Publisher: Diamond Pocket Books Pvt Ltd
Published: Feb 27 2026
Pages: 304
Weight: 1.10
Height: 0.81 Width: 5.50 Depth: 8.50
Language: Hindi
सत्]य न तो नया है न पुराना। जो नया है, वह पुराना हो जाता है। जो पुराना है, वह कभी नया था जो नये से पुराना होता है, वह जन्म से मृत्]यु की ओर ले जाताहै। सत्]य का न कोई जन्]म है, न कोई मृत्]यु है। इसलिए सत्]य न नया हो सकता है, न पुराना हो सकता है। सत्]य सनातन है। सनातन का अर्थ, सत्]य समय के बाहर है, बियांड टाइम है। वस्]तुत समय के भीतर जो भी है, वह नया भी होगा और पुराना भी होगा। समय के भीतर जो है, वह पैदा होगा और मरेगा भी, जवान भी होगा और बूढ़ा भी होगा। कभी स्]वस्]थ भी होगा और कभी अस्]वस्]थ भी होगा। समय के भीतर जो है, वह परिवर्तन होगा, समय के बाहर जो है, वही अपरिवर्तित हो सकता है।

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