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Kaalbhojaditya Rawal

Kaalbhojaditya Rawal

Paperback

General Fiction

ISBN10: 9391531725
ISBN13: 9789391531720
Publisher: Independent Cat
Published: Sep 10 2022
Pages: 322
Weight: 1.04
Height: 0.72 Width: 6.00 Depth: 9.00
Language: Hindi
हरित ऋषि के शिष्य और महादेव के परमभक्त कालभोज ने ब्राह्मणावाद में हिन्द की संयुक्त सेना और अरबियों के मध्य हुए युद्ध में ऐसे शौर्य का प्रदर्शन किया कि उसकी गूँज बगदाद की राजधानी ईराक तक पहुँची विजय के उपरांत सिंधु नरेश राय दाहिरसेन ने ईराक के सुल्तान अलहजाज और खलीफा अल वालिद बिन अब्दुल मलिक को आलोर समेत अपने राज्य के हर नगर से सैनिक चौकियाँ हटाने की चेतावनी दी इस अपमान के प्रतिशोध और सिंध को जीतने के लिए हजाज ने अपने सबसे योग्य हाकिम मुहम्मद बिन कासिम को चुना इधर कालभोज ब्राह्मणावाद के युद्ध के उपरांत मेवाड़ के नागदा ग्राम में लौटा तो साबरमती के जल में दिखते प्रतिबिम्बों और उससे जुड़े स्मृतियों ने उसके हृदय के घाव पुनः हरे कर दिये बिछड़े हुए कुछ अपने मिले तो जीवन के अनेकों प्रश्न सामने आकर खड़े हो गये कभी मित्रवत दिखायी पड़ने वाले सहचर संदेह के घेरे में आ खड़े हुए जीवनलक्ष्य की ज्योति संशय के अंधकार में मंद पड़नी आरंभ हो गयी वहीं मुहम्मद बिन कासिम, सिंध पर विजय प्राप्त करने की योजना बनाते हुए धीरे-धीरे अपने लोगों और सिंध विद्रोहियों के साथ मिलकर उस राज्य को दीमक की तरह चाटना आरम्भ कर चुका था दूसरी ओर जब कालभोज का परिचय अपने ज

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