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Jal Mein Kamal: Bhagwat Gita Ka Manovigyan Bhag-6 (जल में कमल भगवद् &#23

Jal Mein Kamal: Bhagwat Gita Ka Manovigyan Bhag-6 (जल में कमल भगवद् 

Hardcover

Philosophy

ISBN10: 9376969898
ISBN13: 9789376969890
Publisher: Diamond Pocket Books Pvt Ltd
Published: Feb 27 2026
Pages: 344
Weight: 1.03
Height: 0.94 Width: 5.00 Depth: 8.00
Language: Hindi
कर्म-संन्]यास विश्राम की अवस्]था, आलस्]य की नहीं। कर्मयोग और कर्म-संन्]यास दोनों के लिए शक्ति की जरूरत है दोनों के लिए। आलसी दोनों नहीं हो सकते। आलसी कर्मयोगी तो हो ही नहीं सकता, क्]योंकि कर्म करने की ऊर्जा नहीं है। आलसी कर्मत्]यागी भी नहीं हो सकता, क्]योंकि कर्म के त्]याग के लिए भी विराट ऊर्जा की जरूरत है। जितनी कर्म को करने के लिए जरूरत है, उतनी ही कर्म को छोड़ने के लिए जरूरत है। हीरे को पकड़ने के लिए मुट्ठी में जितनी ताकत चाहिए, हीरे को छोड़ने के लिए और भी ज्]यादा ताकत चाहिए। देखें छोड़कर, तो पता चलेगा। एक रुपये को हाथ में पकड़े हुए खड़े रहे सड़क पर, और फिर छोड़ें। पता चलेगा कि पकड़ने में कम ताकत लग रही थी, छोड़ने में ज्]यादा ताकत लग रही है।

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