• Open Daily: 10am - 10pm
    Alley-side Pickup: 10am - 7pm

    3038 Hennepin Ave Minneapolis, MN
    612-822-4611

Open Daily: 10am - 10pm | Alley-side Pickup: 10am - 7pm
3038 Hennepin Ave Minneapolis, MN
612-822-4611
Anoothee Ghazalen

Anoothee Ghazalen

Paperback

General Fiction

ISBN10: 9391571131
ISBN13: 9789391571139
Publisher: Independent Cat
Published: Oct 7 2022
Pages: 120
Weight: 0.35
Height: 0.28 Width: 5.50 Depth: 8.50
Language: Hindi
रमेश 'कँवल' ग़ज़ल की दुनिया ख़्वाबों की दुनिया से भी ज़्यादा फैली हुई है। कोई ग़ज़ल छोटी बहर में है तो कोई बड़ी बहर में है। 2 रुक्न से लेकर 16 -16 रुक्न तक की ग़ज़लें कही गयी हैं। लेकिन एक रुक्न की ग़ज़लें इक्का-दुक्का ही देखने में आती हैं। जी में आया क्यों नहीं मात्र एक रुक्नी ग़ज़लों का ही एक ग़ज़ल संग्रह मंज़रे-आम पर लाया जाय । लिहाज़ा दोस्तों से गुज़ारिश की । कुछ दोस्तों ने प्रोत्साहित करने में आनाकानी की तो कुछ ने मेरी हौसला अफज़ाई की और देखते ही देखते 150-200 ग़ज़लें व्हाट्सअप और मेल पर दस्तक देने लगीं । एक रुक्नी ग़ज़लें कहना आसान नहीं । एक रुक्न के दो मिसरों (शे'र) में पूरी बात कहना बहुत मुश्किल फ़न है। लगता है बात आधी अधूरी रह गयी । इस ग़ज़ल संग्रह के बेशतर शायरों ने एक रुक्न में भी बेहतरीन अशआर तलाश कर लिए हैं। इस ग़ज़ल संग्रह के लिए 7 बहरों का इन्तख़ाब किया गया । मुतदारिक, मुतक़ारिब, रमल, हजज़, रजज़, कामिल और वाफ़िर। आधे से ज़्यादा ग़ज़लकारों ने सातों अर्कान पर ख़ूबसूरत ग़ज़लें कही हैं तो कुछ शायर एक-दो रुक्न में ही अनूठी ग़ज़लें भेज सके । आइये इन अनूठी एक रुक्नी ग़ज़लों का लुत्फ़ उठाइये; रसास्वादन कीजिए और मुझे अपनी गिरांक़द्र राय से नवाज़ने की इनायत करिए । पटना, 2 जून,2022 स्नेहाकांक्षी रमेश '

Also in

General Fiction