• Open Daily: 10am - 10pm
    Alley-side Pickup: 10am - 7pm

    3038 Hennepin Ave Minneapolis, MN
    612-822-4611

Open Daily: 10am - 10pm | Alley-side Pickup: 10am - 7pm
3038 Hennepin Ave Minneapolis, MN
612-822-4611
Taveez

Taveez

Paperback

General Poetry

ISBN10: 9388241428
ISBN13: 9789388241427
Publisher: Manjul Publishing House Pvt Ltd
Published: Jan 15 2019
Pages: 222
Weight: 0.63
Height: 0.51 Width: 5.50 Depth: 8.50
Language: Hindi
कोई शिकवा कोई किस्सा पुराना ढूँढ लेते हैं हम उन से रोज़ मिलने का बहाना ढूँढ लेते हैं ख़ुशी और ग़म मैं जीने का सलीक़ा जिनको आता है ख़िज़ाँ की रुत में भी मौसम सुहाना ढूँढ लेते हैं दलीलें कितनी ही दीजे वो क़ायल ही नहीं होते सताने के लिए कुछ भी बहाना ढूँढ लेते हैं नज़र से उसकी बच जाओगे ख़ुशफ़हमी में मत रहना ख़ुदा के तीर खिड़ अपना निशाँ ढूँढ लेते हैं 'मंज़र' की हौसलामन्द तबियत चन्द मुशायरों पर अपनी छाप छोड़ के मुत्मईन नहीं हो सकी. वह तो एक सदी पर अपनी छाप छोड़ना चाहते हैं. 'मंज़र' की उलुलअज़मी मैं वही मासूमियत है जो उस बच्चे की हुकुम में पाई जाती है जो br>चाँद को पकड़ने के लिए मान की गोद में बार-बार मचलता है. मुशायरों के नाम पर आजकल जो मेले लगते हैं उनमें कामयाबी के लिए, 'मंज़र' भोपाली की आवाज़ काफ़ी है. खुशगुलुई के साथ-साथ उनके यहाँ फ़िक्र भी पाई जाती है और अपने माहौल, अपने ज़माने से बाख़बर भी हैं. उन्हें यह हक़ पहुँचता है कि वह बढ़ जाने कि कोशिश करें, अगर वह ऐसा करें तो मेरी दुआएं उनके साथ हैं. -कैफ़ी आज़मी.

Also in

General Poetry