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Kaware Sajde

Kaware Sajde

Paperback

General Poetry

ISBN10: 9391531873
ISBN13: 9789391531874
Publisher: Independent Cat
Published: Sep 22 2022
Pages: 84
Weight: 0.26
Height: 0.20 Width: 5.50 Depth: 8.50
Language: Hindi
कंवारे सज्दे (ग़ज़ल-संग्रह) मेरी पहली पुस्तक है। किताब की शक्ल लेने में मुझे काफी समय लगा। किसी ने कहा है कि कवि तीन प्रकार के होते हैं। पहला छिपने वाला, दूसरा छपने वाला और तीसरा मंचीय कवि। मैं शायद पहला वाला ही हूं। छिपने की वजह से ही मुझे छद्म नाम रखना पड़ा। छिपने के कई कारण हैं। मैं शायर कम दीवाना अधिक हूं। और दीवानों की हालत तो सब जानते हैं। मर्यादा में दिखने के लिए छिपना ही पड़ता है। घुटन से निजात पाने के लिए मैं अपने दर्द को कागज़ पर उकेर-उकेर कर उसे छिपाता रहा। जब मुझे लगा कि दुनिया के सामने अपने अनुभव को अभिव्यक्त करना चाहिए। तब मैं अपनी रचनाएं सन् 2010 से पत्र-पत्रिकाओं में प्रेषित करने लगा। धनाभाव के कारण कम ही लिफाफे प्रेषित कर पाया। दो-तीन साल तक यह सिलसिला चलता रहा। लेकिन असफल रहा। सभी रचनाएं वापस आती रहीं। 2013 में समाचार-पत्र दैनिक भास्कर के साप्ताहिक कालम 'रसरंग' में मेरे द्वारा प्रेषित की गई दुष्यंत कुमार की एक ग़ज़ल छपी। यह एक ईनामी योजना थी। मुझे ईनाम तो घोषित किया गया लेकिन मिला नहीं। फिर सन् 2021 में मेरी पहली कविता गुफ़्तगू में छपी। इसके बाद क्रमशः ग़ज़लें भी छपने लगीं। इसके बाद सांझा संकलनों में भी मुझे स्थान मिलने &#

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