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Parikhana

Parikhana

Paperback

Biographies General

ISBN10: 9350643901
ISBN13: 9789350643907
Publisher: Rajpal
Published: Jun 11 2017
Pages: 176
Weight: 0.51
Height: 0.41 Width: 5.50 Depth: 8.50
Language: Hindi
परीख़ाना जहाँ एक तरफ़ नवाब वाजिद अली शाह की रंगीन जि़न्दगी की खुली दास्तान है वहीं दूसरी तरफ़ यह उन्नीसवीं सदी की लखनवी संस्कृति का कीमती दस्तावेज़ है। नवाब वाजिद अली शाह (30 जुलाई 1822-21 सितम्बर 1887) अवध के दसवें और आखिरी नवाब थे जिन्होंने नौ वर्षों तक अवध पर शासन किया। साहित्य और संस्कृति से बेहद लगाव रखने वाले वे एक कुशल शासक और संवेदनशील राजा थे जिन्हें प्रेम-मोहब्बत में सराबोर रहना पसन्द था। वह कत्थक के कुशल नर्तक और शास्त्रीय संगीत के सच्चे साधक थे जिन्होंने कई नये राग भी ईजाद किये। शास्त्रीय गायन की विधा, 'ठुमरी' को लोकप्रिय करने में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान था। लिखने-पढ़ने का भी नवाब वाजिद अली शाह को बहुत शौक था और उन्होंने 60 से अधिक पुस्तकों की रचना की। नवाब वाजिद अली शाह के शासनकाल में लखनऊ उत्तर भारत का सांस्कृतिक केन्द्र बन गया था जहाँ पर हर कलाकार को अपनी कला दर्शाने का अवसर प्राप्त होता था। लखनऊ में उन्होंने 'परीख़ाना' नाम का एक रंगारंग महल कायम किया जहाँ सैकड़ों लड़कियों को राजसी खर्च पर नृत्य और संगीत की शिक्षा दी जाती थी। यहाँ से निकली लड़कियों को 'परी' कहा जाता था जैसे सुलतान परी, माहरुख परी। इनमें से बहुतों के साथ 

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