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Dimagi Gulami

Dimagi Gulami

Paperback

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ISBN10: 9356827907
ISBN13: 9789356827905
Publisher: Prabhakar Prakashan Private Limited
Published: Feb 22 2024
Pages: 70
Weight: 0.20
Height: 0.15 Width: 5.50 Depth: 8.50
Language: Hindi
जिस जाति की सभ्यता जितनी पुरानी होती है, उसकी मानसिक दासता के बन्धन भी उतने ही अधिक होते हैं। भारत की सभ्यता पुरानी है, इसमें तो शक ही नहीं और इसलिए इसके आगे बढ़ने के रास्ते में रुकावट भी अधिक हैं। मानसिक दासता प्रगति में सबसे अधिक बाधक होती है। हमारे कष्ट, हमारी आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक समस्याएँ इतनी अधिक और इतनी जटिल हैं कि हम तब तक उनका कोई हल सोच नहीं सकते जब तक कि हम साफ-साफ और स्वतंत्रतापूर्वक इन पर सोचने का प्रयत्न न करें। वर्तमान शताब्दी के आरम्भ में भारत में राष्ट्रीयता की बाढ़ सी आ गई, कम से कम तरुण शिक्षितों में। यह राष्ट्रीयता बहुत अंशों में श्लाघ्य रहने पर भी कितने ही अशो में अंधी राष्ट्रीयता थी।-इसी पुस्तक से

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