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Guldasta

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Paperback

General Poetry

ISBN10: 938745648X
ISBN13: 9789387456488
Publisher: Harpercollins 360
Published: Jul 25 2018
Pages: 202
Weight: 0.49
Height: 0.46 Width: 5.00 Depth: 8.00
Language: Hindi
मेरी कविता संग्रह की एक ही वजह है-उलझन यह उलझन जब मन के सभी दीवारों को तोड़कर कलम के रास्ते स्याही के सहारे पन्नों पर उतर जाती है तो कविता बन जाती है इसी उलझन ने भावनाओं को जन्म दिया है और फिर इसी उलझन ने रचनाओं को जन्म दिया है किसी की खोज नहीं, कुछ पा लाने की चाह नहीं, कोई हसरत नहीं कोई रास्ता या मुकाम नहीं बस दुनिया ऐसी क्यों है, इसी की उलझन ने परेशान कर रखा है हर मोड़ पे इंसान को रुक कर खुद को खंगालना और फिर तराशना चाहिए शायद इसी उलझन और परेशानियों ने मेरी कविताओं को संवारा है ज़िन्दगी के इसी उलझन से जूझते हुए मैंने कुछ रचनाओं को जन्म दिया है कोई बड़ा फलसफा नहीं कुछ हलकी फुलकी सी दिल की बातें कोई बड़ा सिद्धांत नहीं बस मन भारी हो जाने पे कलम से बह जाने वाली पीड़ा पाठकों से बस एक ही निवेदन है दुनिया जैसी होनी चाहिए थी वैसी तो नहीं ऐसे माहौल में शिवेंद्र की कविताएं ही सही तुम्हे पन्नों में अपना अक्स मिले तो रो न देना अब कहाँ मिलते हैं कविता में आईने कहीं

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