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Ek Hi Chehra Tha Ghar Main

Ek Hi Chehra Tha Ghar Main

Paperback

General Poetry

ISBN10: 9388241975
ISBN13: 9789388241977
Publisher: Manjul Publishing House Pvt Ltd
Published: Jul 20 2019
Pages: 142
Weight: 0.41
Height: 0.33 Width: 5.50 Depth: 8.50
Language: Hindi
कहने को एक आईना टूट बिखर गया लेकिन मिरे वजूद को किरचों से भर गया मैं जाने किस ख़याल के तनहा सफ़र में था अपने आहूत करीब से होकर गुज़र गया इक आशना से दर्द ने चौंका दिया मुझे मैं तो समझ रहा था मिरा ज़ख्म भर गया शायद कि इन्तजार इसी पल का था उसे कश्ती के डूबते ही वो दरिया उतर गया मुद्दत से उसकी छाँव में बैठा नहीं कोई इस सायादार पेड़ इसी ग़म में मर गया खुशबीर सिंह 'शाद' का कलाम उर्दू के अदबी हलकों में दिलचस्पी से पढ़ा जा रहा है। एक ज़माना था जब मुशायरों में कुबूले-आम मेयार की सनद हुआ करता था लेकिन अगर किसी का क़लाम समाईन को भी मुतासिर करें और क़ारीन को भी मुतवज्जा करने में कामयाब हो तो उसका इस्हाक़ मुसल्लम हो जाता है। - गोपीचंद नारंग.

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